राष्ट्रोत्थान गुरुकुलम्, जो धर्म और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित है, उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के बांगरमऊ में शांत और पवित्र सई नदी के तट पर स्थित है। इसका संचालन एवं संरक्षण राष्ट्रोत्थान धर्मार्थ न्यास द्वारा किया जाता है। गुरुकुलम् ने अपनी शैक्षणिक यात्रा वर्ष 2023–2024 में मात्र 11 प्राथमिक स्तर के छात्रों के साथ आरंभ की, यद्यपि इसकी परिकल्पना और योजना कई वर्षों से चल रही थी। इसकी स्थापना का उद्देश्य क्षेत्र में पारंपरिक गुरुकुल शिक्षा के अभाव को दूर करना तथा स्थानीय समाज में सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का संवर्धन करना है। इसके संस्थापक श्री राजेंद्र तिवारी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीनू तिवारी राष्ट्रसेवा के प्रति गहन समर्पण रखते हैं। राजेंद्र जी एक आध्यात्मिक प्रवृत्ति के व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन समाज के उत्थान और भारत की सुदृढ़ता के लिए समर्पित है। दोनों का साझा दृष्टिकोण राष्ट्र-निर्माण में सार्थक योगदान देना है। इस संकल्प को सुव्यवस्थित और क्रियान्वित रूप देने हेतु आचार्य योगेश निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। वे गुरुकुल शिक्षा पद्धति में पारंगत हैं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा का गहन ज्ञान रखते हैं। वे शिक्षा को धर्म से जोड़ते हुए एक समग्र एवं मूल्यपरक गुरुकुल प्रणाली विकसित करने के लिए पूर्णतः समर्पित हैं। आधुनिक विषय जैसे गणित, अंग्रेजी एवं विज्ञान का शिक्षण शुभम जी द्वारा किया जाता है, जो शैक्षणिक व्यवस्था के साथ-साथ अन्य संस्थागत व्यवस्थाओं का भी संचालन करते हैं। वैदिक शिक्षा के लिए आचार्य श्री देवेश जी नियुक्त हैं। वे छात्रों को गीता, पुराणों एवं अन्य धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान प्रदान करते हैं और उन्हें समस्त शास्त्रों की व्यापक समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं। शारीरिक प्रशिक्षण, मार्शल आर्ट्स एवं पारंपरिक युद्ध कौशल का शिक्षण सिद्धांत जी द्वारा दिया जाता है। वे अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं और छात्रों में शक्ति, अनुशासन तथा आत्मविश्वास का विकास करने के लिए समर्पित हैं। अपने सभी सदस्यों के समर्पण, अनुशासन और सामूहिक सहयोग से राष्ट्रोत्थान गुरुकुलम् निरंतर प्रगति और उत्कृष्टता के पथ पर अग्रसर है।
यह गुरुकुल राष्ट्रोत्त्थान धर्मार्थ न्यास द्वारा संचालित एवं पोषित है। इस संस्था के संस्थापक श्री राजेन्द्र तिवारी जी हैं। श्री तिवारी का जन्म रायबरेली में हुआ था। उनका मुख्य उद्देश्य इस गुरुकुल के माध्यम से ऐसे संस्कारित एवं चरित्रवान व्यक्तियों का निर्माण करना है, जो भारतीय संस्कृति, गौरव एवं समृद्धि के मूल्यों को आत्मसात करते हुए समाज के उत्थान में योगदान दें।
श्री राजेन्द्र तिवारी एक धर्मनिष्ठ एवं सुसंस्कृत व्यक्तित्व के धनी हैं। व्यावसायिक रूप से वे विदेश में एक सफल उद्यमी हैं, किन्तु उनका हृदय सदैव भारत सेवा के लिए समर्पित रहता है। भारत के विकास एवं उत्थान में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने की उनकी गहरी आकांक्षा है।
यह गुरुकुल राष्ट्रोत्त्थान धर्मार्थ न्यास द्वारा संचालित एवं पोषित है। इसके संस्थापक श्री राजेन्द्र तिवारी जी हैं। गुरुकुल के कार्यों को धरातल पर साकार रूप देने के लिए संचालन का दायित्व श्री योगेश शुक्ला जी के हाथों में है। वे शिक्षा और धर्म के समन्वय के साथ गुरुकुल के प्रति पूर्णतः समर्पित हैं। आधुनिक विषयों के शिक्षण सहित अन्य समस्त व्यवस्थाएँ भी उनके निर्देशन में संपन्न होती हैं।
वैदिक विषयों के अध्यापन हेतु यहाँ आचार्य श्री अम्बरीष जी नियुक्त हैं, जो गुरुकुल में ही विद्यार्थियों के साथ निवास करते हैं। अन्य सहयोगी सदस्यों के सहयोग और समर्पण से यह गुरुकुल निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
व्यक्ति के सर्वांगीण विकास हेतु चरित्र मूल में होता है जबकि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में यह पक्ष लगभग उपेक्षित है। अतः ऐसे चरित्रवान बालकों के निर्माण हेतु, जो सांसारिक यात्रा के साथ, अंतःकरण की यात्रा भी सफलतापूर्वक पूर्ण करें, गुरुकुल की स्थापना।
१. भारत एवं विश्व में सभी राष्ट्रवादियों और सनातनी देवियों, महात्माओं और संगठनों को एक सूत्र में जोड़ना।
२. भारत के सामाजिक, आर्थिक, वैचारिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक विकास हेतु कार्य करना।
३. भारत के बच्चों और युवा पीढ़ी के सर्वांगीण विकास हेतु कार्यक्रम चलाना।
४. सभी भारतवंशियों में राष्ट्र और सनातन धर्म के प्रति कर्तव्य बोध की जागृति
५. गुरुकुल व्यवस्था के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देना।