राष्ट्रोत्थान गुरुकुलम में शिष्यों के शिक्षण का 'द्वितीय स्तर' सफलतापूर्वक संपन्न
22 मई, 2026 को राष्ट्रोत्थान गुरुकुलम, बांगरमऊ, उन्नाव में शिक्षण-काल के दो वर्ष पूरे हुए साथ ही शिष्यों के शिक्षण का द्वितीय स्तर (शून्य एवं पृथ्वी स्तर) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य योगेश ने बालकों एवं परिजनों को संबोधित करते हुए निम्न संदेश दिया :
"आप सभी को अत्यंत हर्ष के साथ सूचित करता हूँ कि आज हम अपने शिक्षण-काल के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँचे हैं।
योजना और क्रियान्वयन के सामंजस्य से होकर गुजरती इस यात्रा का यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है।
हमने बालकों के शिक्षण-मापन को विभिन्न स्तरों में विभाजित किया है। इसका प्रथम भाग है — शून्य स्तर। यह प्राथमिक स्तर है, जिसमें बालक गुरुकुल में रहना, समय पर जागना-सोना तथा मर्यादित और उचित प्रकार से बोलना सीखते हैं।
द्वितीय स्तर है — पंचतत्त्वों में प्रथम, पृथ्वी स्तर।
इस स्तर में बालकों के चित्त पर पृथ्वी के समान स्थिरता, शुद्धि तथा विविध विषयों के बीजारोपण का कार्य किया जाता है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण स्तर है।
इस चरण में अनेक विषयों का परिचय, बोध-निर्माण, निर्णय लेने की क्षमता तथा चिंतन की आधारभूमि निर्मित होती है।
आप सभी को हर्षपूर्वक यह कह सकता हूँ कि आज से यह स्तर भी पूर्ण हुआ।
अब जल स्तर का आरम्भ होगा। इस स्तर में बालक पूर्व ज्ञात विषयों के व्यावहारिक पक्ष का ज्ञान प्राप्त करेंगे तथा अपने रुचिक्षेत्र और विषयों के निर्धारण की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
हम गुरुकुल में किसी भी बालक की दिशा निर्धारित नहीं करते, हम केवल उसे अपनी दिशा प्राप्त करने में सहयोग और पोषण प्रदान करते हैं।
आपको यह सब पढ़ते हुए स्वप्न या कल्पना जैसा प्रतीत हो सकता है, और वास्तव में यह एक स्वप्न ही है — परंतु ऐसा स्वप्न, जिस पर अनेक जन पूर्ण निष्ठा, समर्पण और श्रम के साथ कार्य कर रहे हैं।
आज का दिवस हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर गुरुकुल एवं इस समस्त प्रयास के लिए आप सभी की शुभकामनाएँ और आशीर्वाद अपेक्षित हैं, ताकि हम ऐसी समग्र शिक्षण-विधि विकसित कर सकें जो भारतीयता के मूल स्वरूप को धारण करती हो तथा आधुनिकता के शुद्ध और हितकारी पक्ष को भी स्वीकार करती हो।
धर्म की जय हो।
— आचार्य योगेश
"आप सभी को अत्यंत हर्ष के साथ सूचित करता हूँ कि आज हम अपने शिक्षण-काल के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँचे हैं।
योजना और क्रियान्वयन के सामंजस्य से होकर गुजरती इस यात्रा का यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है।
हमने बालकों के शिक्षण-मापन को विभिन्न स्तरों में विभाजित किया है। इसका प्रथम भाग है — शून्य स्तर। यह प्राथमिक स्तर है, जिसमें बालक गुरुकुल में रहना, समय पर जागना-सोना तथा मर्यादित और उचित प्रकार से बोलना सीखते हैं।
द्वितीय स्तर है — पंचतत्त्वों में प्रथम, पृथ्वी स्तर।
इस स्तर में बालकों के चित्त पर पृथ्वी के समान स्थिरता, शुद्धि तथा विविध विषयों के बीजारोपण का कार्य किया जाता है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण स्तर है।
इस चरण में अनेक विषयों का परिचय, बोध-निर्माण, निर्णय लेने की क्षमता तथा चिंतन की आधारभूमि निर्मित होती है।
आप सभी को हर्षपूर्वक यह कह सकता हूँ कि आज से यह स्तर भी पूर्ण हुआ।
अब जल स्तर का आरम्भ होगा। इस स्तर में बालक पूर्व ज्ञात विषयों के व्यावहारिक पक्ष का ज्ञान प्राप्त करेंगे तथा अपने रुचिक्षेत्र और विषयों के निर्धारण की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
हम गुरुकुल में किसी भी बालक की दिशा निर्धारित नहीं करते, हम केवल उसे अपनी दिशा प्राप्त करने में सहयोग और पोषण प्रदान करते हैं।
आपको यह सब पढ़ते हुए स्वप्न या कल्पना जैसा प्रतीत हो सकता है, और वास्तव में यह एक स्वप्न ही है — परंतु ऐसा स्वप्न, जिस पर अनेक जन पूर्ण निष्ठा, समर्पण और श्रम के साथ कार्य कर रहे हैं।
आज का दिवस हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर गुरुकुल एवं इस समस्त प्रयास के लिए आप सभी की शुभकामनाएँ और आशीर्वाद अपेक्षित हैं, ताकि हम ऐसी समग्र शिक्षण-विधि विकसित कर सकें जो भारतीयता के मूल स्वरूप को धारण करती हो तथा आधुनिकता के शुद्ध और हितकारी पक्ष को भी स्वीकार करती हो।
धर्म की जय हो।
— आचार्य योगेश
Project Info
Category:
News & Media
Programs:
शिक्षण का द्वितीय स्तर संपन्न
Location:
राष्ट्रोत्थान गुरुकुलम, बांगरमऊ, उन्नाव
Date:
23 May 2026
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