बालकों का उपनयन संस्कार
हमारे गुरुकुल में गुरुवार, 9 जुलाई को आठ बालकों का उपनयन संस्कार वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इन आठ बालकों के उपनयन के साथ ही गुरुकुल में वर्तमान शैक्षिक सत्र के लिए निर्धारित छात्र संख्या पूर्ण हो गई।
उपनयन संस्कार का आयोजन वेदाचार्य देवेश जी के निर्देशन में संपन्न हुआ। गुरुकुल के वरिष्ठ बालकों ने विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का दायित्व संभाला, जबकि सभी अभिभावकों एवं परिजनों ने पूरे कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम का वातावरण पूर्णतः वैदिक, अनुशासित एवं संस्कारमय रहा।
राष्ट्रोत्थान गुरुकुलम विगत तीन वर्षों से बालकों के सर्वांगीण निर्माण के उद्देश्य से वैदिक एवं आधुनिक शिक्षा प्रदान कर रहा है। गुरुकुल समय-समय पर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं संस्कारप्रधान कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में अपना सक्रिय योगदान देता रहा है।
इस अवसर पर गुरुकुल के संचालक आचार्य योगेश शुक्ल जी ने उपस्थित सभी परिजनों, अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उपनयन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बालक के जीवन के नए अध्याय का शुभारंभ है। यह वह संस्कार है जिसके माध्यम से बालक गुरु के सान्निध्य में रहकर ज्ञान, अनुशासन और श्रेष्ठ आचरण के मार्ग पर अग्रसर होता है।
उन्होंने आगे बताया कि उपनयन के पश्चात बालक के आचरण, अध्ययन और उत्तरदायित्व को गंभीरता से देखा जाता है। इससे पूर्व बालक के अनेक दोषों को बाल्यावस्था का स्वाभाविक व्यवहार मानकर माता-पिता सहज भाव से स्वीकार करते हैं, किंतु उपनयन के बाद उसका जीवन संस्कार, संयम और उत्तरदायित्व की दिशा में अग्रसर माना जाता है। यही इस संस्कार का वास्तविक उद्देश्य है।
इस अवसर पर गुरुकुल के संस्थापक श्री राजेंद्र तिवारी जी ने शुभकामनाएं भेजा। उन्होंने उपनयन कार्यक्रम को गुरुकुल की यात्रा में एक सार्थक प्रयास बताया एवं बालकों को उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
उपनयन संस्कार का आयोजन वेदाचार्य देवेश जी के निर्देशन में संपन्न हुआ। गुरुकुल के वरिष्ठ बालकों ने विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का दायित्व संभाला, जबकि सभी अभिभावकों एवं परिजनों ने पूरे कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम का वातावरण पूर्णतः वैदिक, अनुशासित एवं संस्कारमय रहा।
राष्ट्रोत्थान गुरुकुलम विगत तीन वर्षों से बालकों के सर्वांगीण निर्माण के उद्देश्य से वैदिक एवं आधुनिक शिक्षा प्रदान कर रहा है। गुरुकुल समय-समय पर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं संस्कारप्रधान कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में अपना सक्रिय योगदान देता रहा है।
इस अवसर पर गुरुकुल के संचालक आचार्य योगेश शुक्ल जी ने उपस्थित सभी परिजनों, अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उपनयन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बालक के जीवन के नए अध्याय का शुभारंभ है। यह वह संस्कार है जिसके माध्यम से बालक गुरु के सान्निध्य में रहकर ज्ञान, अनुशासन और श्रेष्ठ आचरण के मार्ग पर अग्रसर होता है।
उन्होंने आगे बताया कि उपनयन के पश्चात बालक के आचरण, अध्ययन और उत्तरदायित्व को गंभीरता से देखा जाता है। इससे पूर्व बालक के अनेक दोषों को बाल्यावस्था का स्वाभाविक व्यवहार मानकर माता-पिता सहज भाव से स्वीकार करते हैं, किंतु उपनयन के बाद उसका जीवन संस्कार, संयम और उत्तरदायित्व की दिशा में अग्रसर माना जाता है। यही इस संस्कार का वास्तविक उद्देश्य है।
इस अवसर पर गुरुकुल के संस्थापक श्री राजेंद्र तिवारी जी ने शुभकामनाएं भेजा। उन्होंने उपनयन कार्यक्रम को गुरुकुल की यात्रा में एक सार्थक प्रयास बताया एवं बालकों को उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
Project Info
Category:
News & Media
Programs:
बालकों का उपनयन संस्कार
Location:
राष्ट्रोत्थान गुरुकुलम, बांगरमऊ, उन्नाव
Date:
09 July 2026
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